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बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ तकनीक से à¤à¥à¤°à¥‚ण पहचान
फीटल डीà¤à¤¨à¤ टेसà¥à¤Ÿ कनà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥à¤°à¥‚ण हतà¥à¤¯à¤¾ का नया हथियार बन गया है। इस तकनीक से 6-8 हफà¥à¤¤à¥‡ के à¤à¥à¤°à¥‚ण के लिंग का à¤à¥€ पता लगाया जा सकता है और इसके लिठसिरà¥à¤« मां के बà¥à¤²à¤¡ सैंपल की जरूरत होती है। यहां इस तकनीक का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² बà¥à¤²à¤¡ के आरà¤à¤š फैकà¥à¤Ÿà¤° से संबंधित रिसरà¥à¤š के लिठसिरà¥à¤« à¤à¤®à¥à¤¸ और गंगाराम में हो रहा है, मगर अमेरिका जैसे कई देशों में इस तकनीक का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¥à¤°à¥‚ण के लिंग जांच के लिठà¤à¥€ किया जाता है। à¤à¤¸à¥‡ में, जांच के लिठकà¥à¤› लोग विदेश जाने से à¤à¥€ गà¥à¤°à¥‡à¤œ नहीं कर रहे।
à¤à¤• बड़े पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¥‡à¤Ÿ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² की सीनियर गायनेकॉलजिसà¥à¤Ÿ कहती हैं, पीà¤à¤¨à¤¡à¥€à¤Ÿà¥€ à¤à¤•à¥à¤Ÿ के चलते यहां खà¥à¤²à¥‡ तौर पर गरà¥à¤à¤¸à¥à¤¥ शिशॠके लिंग की जांच नहीं की जा सकती है। बावजूद इसके कई अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड सेंटर गà¥à¤ªà¤šà¥à¤ª तरीके से यह जांच करते हैं, मगर अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड से इसका पता लगाने के लिठकम से कम à¤à¥à¤°à¥‚ण के तीन महीने का होने का इंतजार करना पड़ता है और इसके बाद यहां अबॉरà¥à¤¶à¤¨ कराना न सिरà¥à¤« गैरकानूनी है, बलà¥à¤•ि मां की शारीरिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के हिसाब से à¤à¥€ यह मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है। à¤à¤¸à¥‡ में, वकà¥à¤¤ रहते यह जांच कराने के लिठसà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ संपनà¥à¤¨ तबके के कà¥à¤› लोग बड़ी कीमत चà¥à¤•ाने को à¤à¥€ तैयार रहते हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि अमेरिका में इस जांच पर 390 डॉलर का खरà¥à¤š आता है, जिसे à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ करंसी में बदलें तो करीब 24 हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ बनते हैं। वहां के कà¥à¤› जांच सेंटर बाकायदा वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन जानकारी à¤à¥€ मà¥à¤¹à¥ˆà¤¯à¤¾ करा रहे हैं। à¤à¤• अनà¥à¤¯ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² की सीनियर à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ ने बताया कि कई सेंटर तो कूरियर से मां का बà¥à¤²à¤¡ सैंपल à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ पर ऑनलाइन टेसà¥à¤Ÿ रिजलà¥à¤Ÿ देने जैसी सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤à¤‚ तक मà¥à¤¹à¥ˆà¤¯à¤¾ कराने का दावा कर रहे हैं।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि सामानà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के तहत फीटस (à¤à¥à¤°à¥‚ण) के पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ सेलà¥à¤¸ मरते हैं और मां के बà¥à¤²à¤¡ में घà¥à¤² जाते हैं। मां के बà¥à¤²à¤¡ का सैंपल लेकर बचà¥à¤šà¥‡ का डीà¤à¤¨à¤ उससे अलग किया जा सकता है। इंसानों में वाई कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® सिरà¥à¤« पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में होता है। रीयल-टाइम पॉलिमरेज चेन रिà¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ (आरटी-पीसीआर) का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर डीà¤à¤¨à¤ की थोड़ी सी मातà¥à¤°à¤¾ को à¤à¥€ यह पता लगाने लायक बना लिया जाता है कि मां के डीà¤à¤¨à¤ में वाई कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® मौजूद है या नहीं। इसके मौजूद होने का मतलब है कि उसके गरà¥à¤ में पल रहा à¤à¥à¤°à¥‚ण लड़का है। à¤à¤¡à¤µà¤¾à¤‚स तकनीक होने की वजह से इस पूरी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में सिरà¥à¤« मां के तीन बूंद खून की जरूरत होती है। à¤à¥à¤°à¥‚ण के छह- सात हफà¥à¤¤à¥‡ तक का होने तक अबॉरà¥à¤¶à¤¨ करना काफी आसान होता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आजकल इसके लिठकई तरह की दवाà¤à¤‚ मारà¥à¤•ेट में उपलबà¥à¤§ हो गई हैं। डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ का कहना है कि अगर कनà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥à¤°à¥‚ण की समसà¥à¤¯à¤¾ को खतà¥à¤® करना है तो सरकार को अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड जैसी परंपरागत तकनीकों के साथ-साथ नई तकनीकों के दà¥à¤°à¥à¤ªà¤¯à¥‹à¤— की गà¥à¤‚जाइश को à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखकर नियमों में बदलाव करना चाहिà¤à¥¤
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